स्वाला गांव उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र है, जो चंपावत शहर से लगभग 6 किलोमीटर दूर है। यह गांव अब "भूतिया गांव" के नाम से जाना जाता है क्योंकि यहां से लोग डर और रहस्यमयी घटनाओं के कारण पलायन कर गए।
डर, अंधविश्वास और असामान्य घटनाओं के कारण लोग एक-एक कर गांव छोड़ते गए। 1960 के दशक तक यह गांव लगभग पूरी तरह से खाली हो गया और इसे "भूतिया गांव" कहा जाने लगा।
स्वाला गांव की कहानी एक ऐतिहासिक हादसे, सामाजिक डर और अंधविश्वास का मिश्रण है। भूतों की सच्चाई को लेकर अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन यह तय है कि डर और घटनाओं ने गांव को वीरान कर दिया। यह गांव आज भी एक रहस्य और सन्नाटे से घिरा हुआ है।
स्वाला गांव उत्तराखंड राज्य के चंपावत जिले में स्थित है। यह गांव चंपावत ब्लॉक और तहसील में आता है और चंपावत मुख्यालय से लगभग 6 किलोमीटर दक्षिण दिशा में स्थित है। यह गांव "सावला ग्राम पंचायत" के अंतर्गत आता है। इसका पिनकोड 262523 है।
स्वाला गांव से सबसे नजदीकी कस्बा चंपावत है, जो लगभग 6 किलोमीटर दूर है। गांव के आसपास के अन्य गांवों में जमोला, मझेड़ा और घैन प्रमुख हैं। आसपास कई धार्मिक स्थल हैं जैसे नौन चुला मंदिर, हिंगला देवी मंदिर और क्रांतेश्वर महादेव मंदिर।
1952 में PAC (प्रांतीय आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी) के जवानों की एक टुकड़ी स्वाला के पास खाई में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। कहा जाता है कि घायल जवानों ने गांववालों से मदद मांगी, लेकिन कथित रूप से मदद की बजाय उनका सामान लूट लिया गया और घायल जवानों को छोड़ दिया गया। इसके बाद उनकी आत्माओं ने गांव को शापित कर दिया — यह विश्वास प्रचलित हो गया।
स्वाला गांव सिर्फ एक "भूतिया" कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक दुर्घटना, सामाजिक डर, और ग्रामीण विस्थापन का मिश्रण है। सुविधाओं की कमी, अफवाहों और अंधविश्वासों ने इस गांव को वीरान कर दिया। यह उत्तराखंड का एक रहस्यमय लेकिन वास्तविक गांव है, जहां सन्नाटा आज भी बोलता है।